कैसे करूं मैं आज कविता ?

छंदों से करदूं आँख मिचोली,
या लिख दूं कोई सुरीली बोली …
शब्दों की लाली रच दूं,
या रंग दूं पेचीदा अक्षरों की होली ..

कैसे करूं मैं आज कविता ?

वर्णन करूं प्रकृति का रूप,
या भर दूं पन्ने लिख बिरह का दुःख …
बयान कर्रों कोई प्रेम गाथा,
या रुदन करूँ लिख गरीबों की भूख …

कैसे करूं मैं आज कविता ?

लिखूं राजनीती की बातें,
या अंकित करूं माँ की ममता …
चर्चा करूं देश के इतिहास की,
या सिध्ध करूं युवा पीड़ी की क्षमता …

कैसे करूं मैं आज कविता ?

कलम आज तू खुद ही कवी बनजा,
अपनी स्याही से खुद ही कोई रचना रचा …
खुली आँखों से अँधेरा देख रहा हूँ मैं,
और आँखें बंद करूं तो जैसे कोई कोहराम मचा …

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