कैसी होती कविता ?

कैसी होती है कबिता
वह जाये जिसमे छंदों की सरिता
भावों की लालिमा, दुखों की गीता
स्वप्नों के बादल, बिरह की बेथ्या
अनबूजी पहेलियाँ, सूलजी हुई कथा
ऐसी ही होती है कबिता
जिसमे लिखी सारी बाते
मनको भाये, बरबस हंसी आये
साथ लेकर रुलाई, सोच बिबस्ताये
आंखे बरबस भर आये
ऐसी ही होती है कबिता
एकाकीपन की छटपटाहट,
ममता भरे शब्दों की ललक
बंद आँखों से दुनिया देखना
खुली आँखों से स्वप्नों मैं खोजना
पास रहकर भी दूर हो जाना
दूर रहकर भी हर पल साथ रहना
ऐसी ही होती है कबिता
जंहा छंद स्तब्द हो जाये
जो है लेखक की मनोबेय्था
यह है सचे भावों की रचयिता
ऐसे लिखी जाती मन से छंदों की गीता

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