पंख अगर होते मेरे पास

पंख अगर होते मेरे पास
रंगों में भर देता पलाश
शब्दों में भर देता उल्लास
नया पैगाम, नई अभिलाष
पंख अगर होते मेरे पास
दूरी है, मजुबरी है, नहीं हूँ हताश
बिरह में, मिलन का एहसास
उमंग है, तरंग है, मन में है बिश्वास
उड़ आऊंगा, अंतहीन हो चाहे आकाश
पंख अगर होते मेरे पास
शब्द नहीं, व्यक्त हैं बिरह का प्रकाश
कविता नहीं, छंदों में है भावों का विकाश
मन उपवन सा, मरुस्थल सा वास
साथ नहीं, फिर भी साथ होने की आश
पंख अगर होते मेरे पास

3 Comments

  1. abhiraj singh मग्घू 31/12/2012
    • Sajan Murarka Sajan Murarka 01/01/2013
  2. Donal Bhoye 29/10/2013

Leave a Reply