आज मेरा स्कूल क्यों बंद है ?

आज मेरा स्कूल क्यों बंद है ?

 

जिसने  कभी

मस्जिद का दरवाज़ा नहीं देखा

जो कभी

मंदिर की सीढ़ी नहीं चढ़ा

जिसे अभी

धर्म की परिभाषा

मालूम नहीं

सुबह-सुबह

पूछता है मुझसे

आज मेरा स्कूल क्यों बंद है ?

 

सोचता हूँ

कोई बहाना कर दूँ

कोई झूठ बोल दूँ

या भगा दूँ

जाओ

ये तुम्हारे काम की चीज़ नहीं

क्या स्कूल जाना

उसके काम की चीज़ नहीं ?

 

इसी उधेडबुन में

दोपहर ढ़लने लगी

पुलिस की इक्का-दुक्का गाड़ियाँ

सड़कों पर दौड़ने लगीं

मानो

एहसास करा रही हैं

अपने होने का

अजीब सा भय है

माहौल में

लोग संभल कर चल रहे हैं

संभल कर बोल रहे हैं

सबको जानने की उत्सुकता भी है

पर उसे

अपने सवाल का जवाब

अब भी नहीं मिला

कोने मे बैठे

मुझे देख रहा है

जैसे

मेरे चेहरे के उतार-चढ़ाव में

अपने सवाल का जवाब

ढूँढ रहा है

आज मेरा स्कूल क्यों बंद है ?

 

(30 सितंबर 2010 को लिखित)

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