पुष्पांजलि…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

आज…तूने मृत्युदूत को
मेरे द्वार पर भेजा है
अज्ञात सागर-पार से
जो मेरे लिये सन्देश लाया है
रात अँधेरी है और मैं भयभीत हूँ
फिर भी दीप हथेली पर लेकर
मैं द्वार खोलता हूँ
और आगे बढ़कर
उसका स्वागत करता हूँ
ये तेरा ही संदेशवाहक है
जो मेरे द्वार पर खड़ा है
मैं व्याकुल होकर, द्रवितनयन से
हाथ जोड़कर उसकी पूजा करूँगा
अपने हृदय का सोम निकालकर
उसके आगे रख दूंगा
वह तेरे आदेश का पालन करते हुए
तेरे प्रभात पर अंधकार की छाया छोड़ते हुए
शून्य भवन में…जहाँ तू बैठा है
तेरे चरणों पर अर्पण कर देगा
मेरी अंतिम…”पुष्पांजलि” ।

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