यही तो तेरा प्रेम है…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

अहा !
यही तो तेरा प्रेम है…ओ
मेरे हृदयहरण !
पत्ते-पत्ते से तेरा दिव्य-आलोक झर रहा है
स्वर्ण की तरह झर-झर…
अलस-मधुर-मेघ, सुगंधित पवन
स्फुरित कर रहे…मेरे तन-मन
अहा ! यही तो तेरा प्रेम है…ओ
मेरे हृदयहरण !
प्रभात के आलोक से
मेरी आँखें भर गयी हैं
तेरी प्रेम-वाणी
मेरे प्राणों में घुल गयी है
ज्यों तेरे नयन झुके
मेरे नयन…तेरे नयन से मिले
तेरे पावन-स्पर्श से
मिट गए सारे भरम…ओ
मेरे हृदयहरण !

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