मेरे सारे अहंकार को…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

मेरा मस्तक…अपनी
चरणधूलि तले झुका दे
मेरे सारे अहंकार को
आँखों के पानी में डुबा दे
मैं करता हूँ अपना ही बखान
छलता हूँ खुद को, रचता हूँ स्वांग
तुझे भूलकर मरता हूँ
प्रतिपल…हे उदार !
मैं व्यर्थ ही अपना प्रचार
न करता फिरूँ…इसलिये
मुझे निमित्त बनाकर
अपनी परम शांति…परम कांति
मेरे प्राणों में भर
मेरे हृदयकमल की आड़ लेकर
तू अपनी अजस्त्र-धारा
मेरी ओर बहा दे
मेरे सारे अहंकार को
आँखों के पानी में डुबा दे ।

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