क्या तेरे सामने खड़ा रहूँगा…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

प्रतिदिन हे जीवनस्वामी !
क्या तेरे सामने खड़ा रहूँगा
हाथ जोड़कर हे भुवनेश्वर !
क्या तेरे सामने खड़ा रहूँगा
तेरे अपार आकाश तले
मैं चुपचाप…एकांत में
नम्रहृदय, द्रवितनयन लिये
क्या तेरे सामने खड़ा रहूँगा
तेरे विचित्र भवसागर में
जुझता हुआ दर्द के पारावार से
दुनिया की अज़नबी भीड़ में
क्या तेरे सामने खड़ा रहूँगा
इस संसार में जब मेरे
सारे कर्म शेष हो जायेंगे
ओ सम्राटों के सम्राट !
क्या तेरे सामने खड़ा रहूँगा ।

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