अनुमति मिल गयी…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

अनुमति मिल गयी
मित्रो ! मुझे विदा करो
मैं प्रस्थान करने वाला हूँ
अंतिम-नमन स्वीकार करो
मित्रो ! मुझे विदा करो
मैं द्वार की कूंजी वापस करता हूँ
घर के सारे अधिकार सौंपता हूँ
केवल प्यार के मीठे-बोल
तुमसे सुनना चाहता हूँ
इतनी मुझ पर कृपा करो
मित्रो ! मुझे विदा करो
हम बहुत दिनों तक साथ रहे
एक-दूजे की पीर सहे
जितना कुछ तुमसे पाया
क्या उतना मैं दे पाया ?
भूल-चूक सब क्षमा करो
मित्रो ! मुझे विदा करो
देखो, आ गया बुलावा
तैयार है यात्रा पर जानेवाला
है सूर्य उदय होनेवाला
कोने में जलते दीपक को
बुझ जाने दो…मित्रो !
मुझे विदा करो ।

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