तुझसे मिलने के लिये…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

तुझसे मिलने के लिये
मैं अकेला ही निकला था
न जाने वह कौन है
जो नीरव अंधकार में
मेरा पीछा करता रहा
उससे बचना तो चाहा
लेकिन…बच न पाया
उन्मक्त होकर बड़ी अकड़ से
धरा से धूल उड़ाता रहा
मेरे हृदय के उदगार को
ऊँचे स्वर से दबाता रहा
हे नाथ ! वह नहीं जानता
वो मेरा अहंकार ही है
तभी तो…मैं लज्जित हूँ
उसे अपने साथ लेकर
तेरे द्वार पर कैसे आऊँ !

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