मुझे जगाकर आज…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

हे नाथ !
मुझे जगाकर आज
जाओ ना जाओ ना, करो
करुणा की बरसात
घने वन की डाली-डाली पे
वृष्टि झरे…आषाढ़-मेघ से
घनघोर बादल आलस भरे
डूबी निद्रा में रात
जाओ ना जाओ ना, करो
करुणा की बरसात
तड़क-तड़क बिजली कड़की
नींद उचट गयी, हे प्राण !
वर्षा की जलधारा के साथ
गाने को जी करता गान
हृदय मेरा अश्रुजल से
बाहर निकला बहकर तम में
अंबर खोजे व्याकुल हो के
उठाकर अपने दो हाथ
जाओ ना जाओ ना, करो
करुणा की बरसात ।

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