सीमा में असीम तुम …रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

सीमा में असीम तुम
बजाओ अपने सुर
झलके तेरा प्रकाश
मन में मधुर-मधुर
वर्ण में…गंध में
गीतों के छंद में
तेरी लीला से, हे अरूप !
जाग उठे अंतःपुर
तभी तो लग रही
तेरी शोभा सुमधुर
सीमा में असीम तुम
बजाओ अपने सुर
खुले रहस्य अनंत के
मिलन में धीरे-धीरे
विश्व-सागर में तेरी
तरंग जब उठे-गिरे
तेरी अपनी छाया नहीं
मेरे हृदय में उभर रही
निरंतर काया तेरी
ओ रे…अश्रुजल में वही
लगे जैसे सुंदर विधुर
तभी तो लग रही
तेरी शोभा सुमधुर ।

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