तुम नीचे उतरे…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

ऊँचे
सिंहासन को छोड़कर
तुम नीचे उतरे…
और मेरे घर के दरवाजे की आड़ लेकर
चुपचाप खड़े रहे
मैं एकांत…कोने में बैठकर
गुनगुनाता रहा…सुर
तेरे कानों तक पहुंचे जिसे सुनकर
ऊँचे सिंहासन को छोड़कर
तुम नीचे उतरे…
तेरी सभा में न जाने कितने गुणी हैं
आज…मुझ गुणहीन के गीतों ने
तेरे प्रेम को उकसाया
और तुम अपने हाथों में
वरमाला लेकर
ऊँचे सिंहासन को छोड़कर
नीचे उतरे…।

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