फूलों की तरह…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

फूलों की तरह
प्रस्फुटित हो मेरे गान
समझूंगा हे नाथ !
मिल गया तेरा दान
जिसे देखकर मैं सदा
आनंदित होता रहूँगा
अपना समझकर तूने
जो दिया है उपहार
अपने स्पर्श से धन्य करो
रखो मेरा अभिमान
यदि पूजा की बेला आ जाये
मेरे गीतों को भले ही
धूल में मिला देना
उस क्षण मेरी शक्ति नहीं रहेगी
जब तेरी ध्वनि गूंजेगी
संसार की सारी सम्पदा तूने
अपने हाथों से लुटायी है
अपने ही हाथों मिटा देना
लेकिन, मेरे गीतों को
“अमर कर दो” हे नाथ !
समझूंगा…जीवन सफल हुआ
सार्थक हुए प्राण ।

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