मिलन की लीला होगी…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

मिलन की लीला होगी
हृदय में यही भाव लेकर
मैं इस जग में आया हूँ
द्वार खुले…अहंकार मिटे
आनंदमय इस संसार में
ओ रे…बिन तेरे कुछ न रहे
जीवन इस तरह सँवर जाये
कि तेरी लीला ही मुझमें
सदा प्रकट होती रहे
दुःख-सुख के विचित्र जीवन में
फिर तेरे सिवा कुछ न रहे
हृदय में यही भाव लेकर
मैं इस जग में आया हूँ

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