खुदा के बन्दों से दोस्ती कीजिये

खुदा के बन्दों से दोस्ती कीजिये
मोहब्बत से रहिये और मस्ती कीजिये

साहिल पे गुफ्तगू न करते रहियो
डूबते हुए के आगे कश्ती कीजिये

बहुत खूब, की है महलों में रोशनी
आबाद गरीबों की गृहस्थी कीजिये

मरिये तो मौत से छिटके उसका नूर
कुछ इस तरह बर्बाद हस्ती कीजिये

मानाकि रहते हो सातवें फ़लक पे
कभी-कभार दिल में बैठकी कीजिये

क्या यूँ ही तमाम होगी उम्र, ऐ दोस्त !
छोडिये दुश्मनी, अब तो दोस्ती कीजिये

Leave a Reply