कि, दिल बहलता नहीं बहलाने से

कि, दिल बहलता नहीं बहलाने से
ये सुनते आया हूँ इक ज़माने से

शायद बहल जाय कुछ कह-सुन के
दिल बहल जाता है, गुनगुनाने से

सब कहते हैं और मैं भी मानता हूँ
जी हल्का होगा हालेदिल सुनाने से

अज़ीब होता है ये दिल का मामला
और भी उलझ जाता है, सुलझाने से

चिराग को जरा ऊपर तो उठाओ
रौशनी फैलती है…….फैलाने से

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