दीपक से मांगो न उजाला…

दीपक से मांगो न उजाला, सूरज का इंतज़ार करो
चुपके-चुपके लम्हा-लम्हा, हृदय का विस्तार करो

हम करें प्रार्थना उसकी जो मुक्ति देने वाला है
एक वही जो इस जग को रचा, मिटाने वाला है
जिसको पाने की ख़ातिर मन इतना मतवाला है
सबसे पहले तुम अपने मन का ठोस आधार करो
चुपके-चुपके लम्हा-लम्हा, हृदय का विस्तार करो

यूँ तो दीपक भी सूरज को आने की राह दिखाता है
लेकिन पहले वो भी तम को अपना मीत बनाता है
फिर उसके आने के बाद खुद-ब-खुद मिट जाता है
जीवन दीपक जैसा हो ये कोशिश बार-बार करो
चुपके-चुपके लम्हा-लम्हा, हृदय का विस्तार करो

कभी-कभी गर्दिश में दीपक की साँसें टूटती हैं
स्नेह उसका झर जाता है, हस्ती उसकी मिटती है
लेकिन कोई दिल में रखे, रात अँधेरी कटती है
जब-तक है ये जीवन तुम औरों का उपकार करो
चुपके-चुपके लम्हा-लम्हा, हृदय का विस्तार करो

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