वो आदमी क्या आदमी जो वक्त पे न काम दे

वो आदमी क्या आदमी जो वक्त पे न काम दे
है आदमी वही जो गिरते हुए को थाम ले

साथ उनके चलो जो ज़िन्दगी-भर साथ दे
सत्य के लिये जो अपने प्राण भी त्याग दे
है आदमी वही जो अपने होने का प्रमाण दे
वो आदमी क्या आदमी जो वक्त पे न काम दे

सुख में रहे मगर दुःख से डरे नहीं
जोश दिल में कभी उत्थान का मरे नहीं
है आदमी वही जो अपने-आप को पहचान ले
वो आदमी क्या आदमी जो वक्त पे न काम दे

चलते रहो रूको नहीं, मंज़िल मिल जायेगी
मन में हो लगन यदि राह मिल जायेगी
है आदमी वही जो सही काम को अंज़ाम दे
वो आदमी क्या आदमी जो वक्त पे न काम दे

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