खिडकियों पे मैंने पर्दा लगा दिया है

खिडकियों पे मैंने पर्दा लगा दिया है
झांकता है कोई, पहरा लगा दिया है

नज़र दुनिया वालों की तिरछी हो गयी है
नज़र न लग जाये, कजरा लगा दिया है

वो कूचे में खड़े हैं, बन के मेरे दुश्मन
जब से जुल्फों में गज़रा लगा दिया है

हाथ उनके सर पे रखा जो मैंने यारों
इल्ज़ाम कोई मुझपे गहरा लगा दिया है

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