कोई गीत यहाँ सुर-ताल में नहीं है

कोई गीत यहाँ सुर-ताल में नहीं है
कोई शख्स अच्छे हाल में नहीं है

किस पर मुसीबत का पहाड़ नहीं टूटा
सुख-दुःख कहो, किस काल में नहीं है

मुझसे जवाब देते नहीं बनता
कोई दम उसके सवाल में नहीं है

जो रंग चढ़े तो फिर कभी न उतरे
वो लाली उसके गुलाल में नहीं है

नक़ाबों की कद्र होती है, इसलिये
आज कोई अपनी खाल में नहीं है

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