मुसीबतें कितनी दफ़ा आयीं

मुसीबतें कितनी दफ़ा आयीं
तब जाकर मेरी सुबह: आयी

पेड़ ने पत्तों से अर्ज़ किया
तो थोड़ी बहुत हवा आयी

इलाज वर्षों से चल रहा था
काम किसी की दुआ आयी

लक्ष्मी पैरों तले बैठी रही
सिरहाने मेरी माँ आयी

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