वो क्या था और क्या बन गया

वो क्या था और क्या बन गया
एक मोहरा षड़यंत्र का, बन गया

ज़िन्दा रहा तो कुछ ना हुआ
और मरते ही खुदा बन गया

ऐसी मौतें अक्सर होती हैं
फिर एक हत्या, हादसा बन गया

ग़ार से निकला एक दरिंदा
और लोगों का मसीहा बन गया

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