रूक जाता अगर उस छाँव में

रूक जाता अगर उस छाँव में
आता न मैं अपने गाँव में

साहिल पे कोई न आया
बहकर नदी के बहाव में

बीती उमर सारी याद में
बैठा न कोई और नाव में

मिले-न-मिले मेरी मंज़िल
बहने दो ग़ज़ल के भाव में

Leave a Reply