आग न फैले आओ धुंआ करते हैं

आग न फैले आओ धुंआ करते हैं
ऐसे हादसे हररोज हुआ करते हैं

इन्साफ के लिये जाएं तो कहाँ जाएं
मुखियाजी इधर-उधर घुमा करते हैं

है दूर-तलक देखिये, अँधेरा-ही-अँधेरा
फिर सुबह होगी, अक्सर सुना करते हैं

भूख न लगे कोई इल्म उन्हें बताओ
जो माँ के सूखे-स्तन छुआ करते हैं

यहाँ कोई किसी का दर्द नहीं बांटता
व्यर्थ ही मुद्रा बनाकर दुआ करते हैं

 

Leave a Reply