निकाल दो जिक्र दिल की किताब से

निकाल दो जिक्र दिल की किताब से
अच्छा रहेगा शायद, मेरे हिसाब से

कहो न दिल की बात, पूछा तो कह दिया
नाराज़ हो गये तुम फ़कत जवाब से

कहता नहीं हूँ मैं तड़पाने के ख्याल से
लगता है डर मुझे अपने ही ख्वाब से

मानिये मेरी न ज़ोर दिल पे डालिये
होती नहीं मोहब्बत, कभी दबाव से

Leave a Reply