याद अपना वो सफ़र आता है

याद अपना वो सफ़र आता है
टहलकर कोई मेरे घर आता है

चौखट पर एक दिया रख दो
कोई उसे लांघ कर आता है

चिलमन ज़रा सरकाकर देखिये
गैर भी अपनों-सा नज़र आता है

ज़िन्दगी औरों की ख़ातिर जियो
मज़ा देर से ही, मगर आता है

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