उसकी आँखें अभी तलक गीली हैं

उसकी आँखें अभी तलक गीली हैं
खोई हुई चिट्ठी आज मिली है

आज़ादी के पहले उसने लिखी थी
तेरे हाथ की बनी चाय पीनी है

लीकर की चाय पीकर उसने कहा था
शक्कर से ज्यादा तेरी मुस्कान मीठी है

आज़ादी मिलेगी, ये तय है लेकिन
वतन की हालत बड़ी दर्दीली है

हिम्मत से काम लेना, खुदाहाफिज़ !
याद रहे तू शहीद की बीवी है

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