किसी के लिये दिल में…

किसी के लिये दिल में अगर दर्द नहीं है
मेरे ख्याल से वो शख्स मर्द नहीं है

मैं वर्षों बाद आया हूँ अपने शहर में
मेरे घर के आगे वो बरगद नहीं है

शाख पे बैठी है बेजान-सी चिड़िया
करीब जा के देखा, उसके पर नहीं है

आतंक का है बोल-बाला इन दिनों बहुत
महफूज़ मेरे देश की सरहद नहीं है

पूछा उसकी माँ से उसकी मौत का सबब
तन के बोली, “वो मेरा अहमद नहीं है”

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