जीना अगर है जीना…

जीना अगर है जीना, सर उठा के जीना
अँधेरे में दिल का दिया जला के जीना

कभी-कभी होगी पत्थरों की बारिश
अंधों को मगर रास्ता दिखा के जीना

तरह-तरह के लोग मिलेंगे सफ़र में
आँखों में अपनी सुरमा लगा के जीना

जीना अगर है जीना, ऐ दोस्त ! ऐसे जीना
नाम शहीदों में अपना लिखा के जीना

दूँढ़ो यहाँ मिलेगा, अमृत भी ज़हर में
ज़िन्दगी को यारों, साधना बना के जीना

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