क्या है आदमी ये क्या है आदमी

क्या है आदमी ये क्या है आदमी
खुदा के ख्वाब का हिस्सा है आदमी

क्यों ढूंढता है खुशबू हिरण की तरह
जबकि अपने अंदर रखा है आदमी

बेहतर है आओ, इबादत करें उसकी
जिसके हाथ का झुनझुना है आदमी

उसकी तरफ जो शख्स है मुख़ातिब
यहाँ जीते-जी वही बना है आदमी

रचनेवाला खुद ही इतना रम गया
उसको अपने जैसा लगता है आदमी

Leave a Reply