कोई ख़ुशी नहीं, कोई ग़म नहीं

कोई ख़ुशी नहीं, कोई ग़म नहीं
मेरे मर्ज़ का कोई मरहम नहीं

जी करे खुद को, मिटा दूँ मगर
इतना भी मुझमें है दम नहीं

क्या-क्या न किया उनकी ख़ातिर
बचा इश्क़ में कोई करम नहीं

कोई मेरे लिये दुआ क्यों करे
दर्द किसी का, मुझसे है कम नहीं

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