गुमसुम रहते हो, मामला क्या है

गुमसुम रहते हो, मामला क्या है
उसके आगे किसी का चला क्या है

मेरा कसूर क्या है, कुछ तो कहिये
इश्क़ है, ये कहने मैं लगा क्या है

रूह न हो अगर ये जिस्म क्या है
बगैर इश्क़, हुस्न वरना क्या है

इश्क़ जिनको नहीं, वो क्या जाने
उसकी उलफ़त में मज़ा क्या है

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