रिश्तों में फ़रक हो अगर…

रिश्तों में फ़रक हो अगर जी नहीं लगता
रिश्तों के बिना आदमी, आदमी नहीं लगता

चटक जाय दिल अगर काँच की मानिंद
फिर ये दिल किसी से कभी नहीं लगता

है प्यार के सिवा कोई हुनर तो कहिये
क्या करूँ बगैर उनके दिल नहीं लगता

देखूँ ज़रा मना के, मान गये तो ठीक
सूरतन वो आदमी सही नहीं लगता

किस बात पे है रंज, मालूम तो चले
ये राज़ खुलेगा, मगर अभी नहीं लगता

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