जब तेरी याद के जुगनू चमके / फ़राज़

जब तेरी याद के जुगनू चमके
देर तक आँख में आँसू चमके

सख़्त तारीक[1] है दिल की दुनिया
ऐसे आलम[2] में अगर तू चमके

हमने देखा सरे-बाज़ारे-वफ़ा[3]
कभी मोती कभी आँसू चमके

शर्त है शिद्दते-अहसासे-जमाल[4]
रंग तो रंग है ख़ुशबू चमके

आँख मजबूर-ए-तमाशा[5]है ‘फ़राज़’
एक सूरत है कि हरसू[6] चमके

शब्दार्थ:

  1. ↑ घनी अँधेरी
  2. ↑ ऐसी दशा में
  3. ↑ वफ़ादारी के बाज़ार में
  4. ↑ सौंदर्य की तीव्रता
  5. ↑ तमाशे के लिए विवश
  6. ↑ हर तरफ़

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