कितने बदले-बदले से तुम लगते हो

कितने बदले-बदले से तुम लगते हो
कभी गुमसुम तो कभी कुमकुम लगते हो

तुम वो गुल हो जिसमे कोई सुगंध नहीं
पहले महकते थे अब कुसुम लगते हो

मेरे तसब्बुर में जो अक्स उभरता है
कसम खुदा की, बहुत खूब लगते हो

वक्त ने हमको जिन साँचों में ढाला है
मैं कुछ लगता हूँ और तुम कुछ लगते हो

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  1. Yashodadigvijay4 11/07/2012

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