जब से हो गये हो तुम पत्थर की तरह

जब से हो गये हो तुम पत्थर की तरह
फैल गये हो शहर में ख़बर की तरह

मैं पत्थर घिसकर आईना बनाता हूँ
ग़र देख सको मेरी नज़र की तरह

ये जादू नहीं, ना ही कोई करिश्मा है
दिल हो जाता है कभी समंदर की तरह

पत्थर कहकर उन्हें पुकारती है दुनिया
जो जीते हैं ज़िन्दगी, सफ़र की तरह

मैंने देखा है पत्थरों को पिघलते हुए
कोई गुज़रा है करीब से मंज़र की तरह

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