हो सकता है हो जाय ख़ता कहीं

हो सकता है हो जाय ख़ता कहीं
खुदा तो होता नहीं है आदमी

बार-बार जिसकी याद आती है
उस शख्स का कहीं अता-पता नहीं

सर पे चढ़ा जब से इश्क़ का जुनूँ
उसे खोजा मैंने कहाँ-कहाँ नहीं

सिर्फ एक बार देखी है सूरत
मुझे हर एक आदमी लगा वही

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