दर्द-ए-दिल को प्यार का मरहम दीजिये

दर्द-ए-दिल को प्यार का मरहम दीजिये
फिर धीरे-धीरे ख़ामियों को कम कीजिये

दवा न दीजिये भले, दुआ न कीजिये
नुकताचीनी किसी की हरदम न कीजिये

औरों के हाल पे हँसने से पहले
कुछ तो अपने-आप पे शरम कीजिये

दूर है मंज़िल तो क्या चलकर देखिये
पहले आगे अपना एक कदम कीजिये

मानाकि वो बहुत सख्त हैं लेकिन
खुद को भी आप ज़रा नरम कीजिये

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