कैसे लिखूँ , लिखने आता अगर मुझे

कैसे लिखूँ , लिखने आता अगर मुझे
ज़रूर लिखता ख़त में ढ़ाई अक्षर तुझे

ज्ञानी नहीं हूँ कि रस का बखान करूँ
गूँगा बना दिया प्यार का असर मुझे

प्रीत की फसल पे ओले गिर पड़े
खेत लगता है दूर-तलक बंजर मुझे

जब मेरी याद आये तो चुप रहना
है यही पैगाम-ए-सुख़नवर तुझे

मैं थोड़ी देर ठहरूँगा, चला जाऊँगा
बाकी है देखना और भी मंज़र मुझे

 

Leave a Reply