आदमी को आदमी बनाना है

आदमी को आदमी बनाना है
सिर्फ मुस्कुराना सिखाना है

रोशनी खुद-ब-खुद फैलेगी
बाती को तनिक उकसाना है

थोड़ी-सी चमक लेकर आया हूँ
मुझे अवाम तलक पहुँचाना है

सफ़र किसी का, अधूरा न रहे
बस, कदम होश में उठाना है

Leave a Reply