हर आदमी खुशनसीब नहीं होता

हर आदमी खुशनसीब नहीं होता
होता अगर ये नसीब नहीं होता

हम भी बना लेते खुद को मगर
खुदा है, कभी यकीन नहीं होता

किसी ने मांगी है दुआ मेरे लिये
वर्ना आज ये नाचीज़ नहीं होता

उसकी आबरू सरेआम लुट जाती
अगर मेरा बेटा शहीद नहीं होता

उम्मीद पे दुनिया कायम है, ऐ दोस्त
उसका मुंतजीर नाउम्मीद नहीं होता

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