हसीनों की अदा में वफा नहीं है

हसीनों की अदा में वफा नहीं है
हम जानते हैं, इसलिये खफ़ा नहीं हैं

हुस्न की तारीफ चाहे जितनी कीजिये
इश्क़ का इल्म उन्हें पता नहीं है

सर पटकने से अच्छा मुँह फेर लेना
बेहतर है कि प्याला छलका नहीं है

करे जो नेक बन्दों को गुमराह
वो किसी का हमनवा नहीं है

उनकी अदा को मोहब्बत न समझिये
अभी क़हर आप पे बरपा नहीं है

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