ये ज़माना वो ज़माना नहीं रहा

ये ज़माना वो ज़माना नहीं रहा
कोई मिल के रहने वाला नहीं रहा

बँटवारे का असर इतना हुआ कि
कोई घर आशियाना नहीं रहा

उसे थी मुकम्मल शख्स की तलाश
मगर कहीं आता-जाता नहीं रहा

कभी-कभार होती थी मुलाक़ात
दिल से वो मुस्कुराता नहीं रहा

टुकड़े-टुकड़े में देखा है खुद को
पूरा चेहरा उठाता नहीं रहा

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