दिल की तमन्ना दिल में ही रही

दिल की तमन्ना दिल में ही रही
आरजू हमेशा मिलने की रही

उनकी फिक्र इतनी न कीजिये
भला, ये उम्र क्या पीटने की रही

पूर्ज-ए-दिल पे पत्थर रख दिया
अब न सूरत कहीं उड़ने की रही

उनसे मिल के यूँ लगा कि उनकी
ख्वाहिश भी कुछ कहने की रही

सच कहा किसी ने, “इश्क़ बला है”
ताउम्र ये बला सर पे ही रही

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