जिसे जीने का सलीका आता है

जिसे जीने का सलीका आता है
वही एक दिन मदीना आता है

जो दिल से मसक्कत करते हैं
उन्हीं के माथे पे पसीना आता है

इक बूँद ना छलके सागर से
अगर, पीने का करीना आता है

कभी-कभी इस मयखाने में
कोई भूले से नगीना आता है

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