सुन-सुन दौड़ पड़ीं सब सखियाँ

रस में ऐसी डूब गयीं फिर
और न खोलीं अँखियाँ
सुन-सुन दौड़ पड़ीं सब सखियाँ

राधा की मिल गयीं श्याम से
आपस में ज्यों अँखियाँ
करती राधा रमण श्याम संग
सुन-सुन डोले सखियाँ
सुन-सुन दौड़ पड़ीं सब सखियाँ

हाँ, रंग दी सब की श्याम ने
उड़ती हुई चुनरिया
सब कहते, “सोलह हजार हैं
कृष्ण की पटरानियाँ”,
सुन-सुन दौड़ पड़ीं सब सखियाँ

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