श्याम उतर के नभ से आये

जब-जब मेघ गगन में छाये
घनश्याम नज़र आये
श्याम उतर के नभ से आये

बिजली चमकी बादल में तो
लगे कान्हा मुस्काये
मेघ-से-मेघ टकराये तो
बंशी श्याम बजाये
श्याम उतर के नभ से आये

मोर-मुकुट माथे पर मानो
इन्द्रधनुष पहनाये
पीली-पीली सरसों जैसी
पीताम्बर-सा भाये
श्याम उतर के नभ से आये

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