देखो, छायी घटा सुहानी

बूँद-बूँद बरसे पलकों से
मोती जैसा पानी
देखो, छायी घटा सुहानी

रूठकर बोलीं सखियाँ, “जा
तू बड़ा बना है दानी”,
अधरों से पी लेतीं कहकर
नयनों का सब पानी
देखो, छायी घटा सुहानी

श्याम उतर के आने से
क्यों करता आना-कानी
सब कहते हैं, “रस बरसेगा
खोल अधर – हे प्राणी !”
देखो, छायी घटा सुहानी

Leave a Reply