कनु ने ऐसी प्रीत जगायी

चिता-समान जल गयी काया
लौ ऐसी उकसायी
कनु ने ऐसी प्रीत जगायी

बन गयी मैं श्याम की जोगन
मति तू ने भरमायी
बाबुल का घर छोड़ा मैंने
कुल की याद न आयी
कनु ने ऐसी प्रीत जगायी

सखियाँ बोलीं भर-भर अँखियाँ
“राधा हुई परायी”
सब कहते हैं, “बिन प्रेमी के
देखो, हुई सगाई”,
कनु ने ऐसी प्रीत जगायी

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